benefits and sideeffects of Himalaya Gokshura In Hindi

गोक्षुरा जमीन पर फैलने वाला बहुत ही आसानी से हर जगह मिलने वाला पूरी तरह से औषधीय क्षमता वाला पौधा है। यह भारत मे हर जगह आसानी से मिल जाता है खासकर हरियाणा और राजस्थान मे। गोक्षुरा छोटे और बड़े दो तरह का होता है लेकिन दोनों के गुणो मे समानता है। इस पौधे को अलग से लगाने की आवश्यकता नहीं होती,यह वर्षा के प्रारम्भ मे खेत और जंगल के आसपास उग आते है।

गोक्षुरा के फूल पीले रंग के होते है,यह सर्दी के मौसम मे होते है। इसकी शाखाएं लगभग ९० सेंटीमीटर लंबी हाती है। इसके पत्ते चने के समान होते है,इसके टहनियो पर रोयें और कांटे होते है, इसके फल कांटेदर होते है कांटेदार होने के कारण यह गाय के खूरों मे फंस जाते है इसलिए इसको गोक्षुरा कहा जाता है।

यह मुलायम, रेसेदार, भूरे रंग की ईंख की जड़ जैसी होती है। इसके फल मे ६ कांटे पाये जाते है।गोक्षुरा मुख्य रूप से पुरुषो के लिए उपयोग की जाने वाली औषधि है,यह पुरुषो मे यौन कमजोरी को दूर करने के लिए प्रयोग की जाती है। इसके सेवन से मांसपेशिया बनती है,टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ता है,जिससे कामेच्छा बढ़ती है और वीर्य विकार दूर होता है। यह पथरी,सांस की तकलीफ,हृदय रोग और प्रजनन संबंधी रोगो की बहुत ही उत्तम दवा है।

गोक्षुरा की सामाग्री (Ingredients of Himalaya Gokshura in Hindi)

गोक्षुरा के बहुत से नाम है,हर जगह के हिसाब से अलग अलग नाम है। गोक्षुरा की पहचान शुरुआत मे यूरोप से हुई,पहले इसका नाम सपोर्टिव किडनी मेयीडियन था,आचार्य चरक ने गोक्षुरा को मूत्रकृच्छानिलहराणाम अर्थात यह मूत्र कृच्छ विसर्जन के समय होने वाले कष्ट को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण औषधि है।यह मधुर रस औषधि है,मुख मे रखते ही प्रसनता का अनुभव होता है,यह बलदायक है और रंग, केश,ओजस,इंद्रियो को बढ़ाता है,यह शरीर को पुष्ट करता है। यह हृदय रोग और प्रजनन अंगों संबंधी रोगो की उत्तम दावा है। यह वात,कफ,पित्त मे भी फायदेमंद है।

यह वाजीकरक और पुरुषो के यौन प्रदर्शन मे सुधार करता है और कमेछा को बढ़ाता है। यह दवा मुख्य रूप से पुरुषो के लिए है।गोक्षुरा की प्रकृति गरम होती है,कमजोर पुरुषो और महिलाओ के लिए यह एक टॉनिक है। इसके सेवन से भूख बढ़ती है,शरीर मे ताकत बढ़ती हैऔर नाभि के नीचे वाले भाग मे अगर सूजन हो गयी हो तो उसे भी कम करता है।

गोक्षुरा के सेवन से पेशाब संबंधी कोई भीं तकलीफ हो ,पेशाब करने पर बहुत बार जलन होती है या फिर पेशाब रूक जाता है तो हिमालया गोक्षुरा बहुत ही उपयोगी है।किडनी मे होने वाले पथरी की यह रामबाण औषधि है,इसके सेवन से पेशाब की मात्रा बढ़ जाती है और पथरी कुछ ही हफ़्तों मे टुकड़े टुकड़े होकर पेशाब के माध्यम से बाहर निकल जाती है। गोक्षुरा का प्रयोग योन शक्ति को बढ़ाने के साथ साथ नपुंसकता और प्रजनन अंगो की कमजोरी को दूर करता है।किडनी के विकारों को भी दूर करता है।यह मासिक धर्म को भी नियमित रखता है,इसका उपयोग दश्मूलारिष्ट को बनाने मे भी किया गया है।

गोक्षुरा के कर्म या इसके एक्शन

१) वस्तिशोधन द्रव्य जो मूत्रल अंगो को साफ करता है।
२) बाजीकरन द्रव्य जो रति शक्ति में वृद्धि करता है।
३) वृष्य द्रव्य जो बलकरक ,बाजीकरक,वीर्य वर्धक हो।
४) मूत्रल द्रव्य जो मूत्र ज्यादा लता है।
५) शीतल द्रव्य जो ठंडा,सुखप्रद,और प्यास,मूर्छा ,पसीना को दूर करता है।
६) अश्मर्गन और बल्य द्रव्य जो पथरी नष्ट करे और बल दे।
७) मूत्रकृच्छ्घ्न द्रव्य हा जो स्ट्रांगुरी को दूर करता है।
८) वातहर और शुक्रकर द्रव्य जो वात दोष निवारक है और शुक्र का पोषण करता है।

गोक्षुरा के उपयोग एवं लाभ इन हिन्दी (Use And Benefits Of Gokshura In Hindi)

१) पथरी के रोग मे

पथरी के रोग मे गोक्षुरा के फलो का चूर्ण सुबह शाम शहद के साथ ३ ग्राम लेना चाहिए इसके नियमित सेवन से किडनी मे होने वाली पथरी टुकड़े टुकड़े हो कर निकल जाती है।

२) पेशाब संबंधी रोग मे

पेशाब संबंधी रोग जैसे बारबार पेशाब होना या फिर रूक रूक कर आना,मूत्राशय की पुरानी सूजन मे गोक्षुरा १० ग्राम,२५० ग्राम दूध,१५० ग्राम पानी को मिलाकर उबाल लेंगे,जब यह आधा रह जाए तो छान कर रोज पीने से मूत्र मार्ग की सारी तकलीफ दूर हो जाती है। इस उपयोग को करने से बहुत से व्यक्तियों को प्रोस्टेट संबंधी तकलीफ मे होने वाले आपरेशन की भी आवश्यकता नहीं होती है। स्त्रियों के जननांग मे होने वाले संक्रमण ,स्वेत प्रदर आदि मे गोक्षुरा का चूर्ण १५ ग्राम घी या मिश्री के साथ लेने से बहुत ही फायदा होता है यह दर्द् निवारक और बलदायक औषधि है।

३) यौन शक्ति के लिए

गोक्षुरा, सतावर, नागबला,खीरेटी,असगंध,को बराबर मात्रा मे कूटकर छान ले और रोज एक छोटा चम्मच दूध के साथ ४० दिन तक ले,इसे लेने से यौन शक्ति बढ़ती है।

४) नपुंसकता मे

गोक्षुरा के बीज का चूर्ण और तिल के बीज का चूर्ण को बराबर मात्र मे मिलाकर शहद के साथ लेने से नपुंसकता और बार बार होने वाले गर्भपात मे भी असरदायक है।

 ५) सुजाक रोग मे

(गनोरिया) सुजाक रोग मे गोक्षुरा को एक घंटे पानी मे भिगोकर उसे अच्छी से छान लेंगे और दिन मे चार बार ५-५ ग्राम देते रहेंगे। यदि पेशाब मे जलन भी हो तो गोक्षुरा के फल और पत्तों का रस पिलाने से वह तुरंत मिट जाती है।

साइड एफफ़ेक्ट्स और सावधानीय (Side Effects and Cautions of Gokshura in Hindi)

१) इस दवा को बच्चो की पहुंच से दूर रखे।
२) इसे ज्यादा मात्रा मे नहीं ले।
३) गोक्षुरा का गुण मूत्रल है,जिससे पेशाब ज्यादा होता है।
४) यदि आपको इसके खाने के बाद कोई भी साइड एफफ़ेक्ट्स नज़र आए तो इसे लेना तुरंत बंद करदे और डॉक्टर की सलाह के बाद ही ले।
५) दवा के सेवन का असर थोड़े डीनो या सप्ताह के बाद ही देखने को मिलता है।

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