Benefits and side effects of Rajvaidya Rasayan Vati

राजवैध रसायन वटी एक आयुर्वेदिक दवा है जो पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। यह पुरुषों की शक्ति को बढ़ाती है और शरीर की कोशिकायों को मजबूत बनाती है।इसके सेवन से से थकावट,चिड़चिड़पन,काम में मन लगना ,शररिक कमजोरी,शरीर में दर्द,जोड़ो में दर्द,सास फलने जैसे बीमारियो दूर होती है। यह रक्त और वीर्य वर्धक है।

यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन, नपुंसकता, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष आदि के इलाज के लिए लाभकारी है। इसमें प्रमुख द्रव्य शुद्ध शिलाजीत है जो एक रसायन है और बल्य औषधि का कार्य करता है। इस योग में त्रिफला और भूमि आमला है जो शुक्रशोधक है। ये पुरुषो के लिए बहुत ही उतम टॉनिक है। इसमें मौजूद भूमि आमला और त्रिफला शरीर को शुद्ध करने के लिए भी एक अद्भुत प्राकृतिक औषधि हैं। इसमें मौजूद अश्वगंधा शुक्रजनन का कार्य करता है।

राजवैध रसायन वटी में अश्वगंधा मौजूद है जो पुरुषों के प्रजनन अंगो पर प्रभाव डालती हैं और वीर्य की गुणवत्ता और मात्रा को भी बढ़ाने में सहायक है। इस का दूसरा घटक भूमि आमला शरीर की कमजोरी को कम करता है और इम्युनिटी को भी बढ़ाता है और त्रिफला तीन जड़ी-बूटियों (आमला, हरड़ और बहेड़ा) का मिश्रण हैं जो शरीर की गन्दगी को बाहर निकालने में सहायता करता हैं और पाचन क्रिया भी ठीक रखता हैं।

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राजवैध रसायन वटी के घटक(Ingredients of rajvaidhya Rasayan Vati in Hindi)

घटक द्रव्य

  • लोह भस्म (५० मिलीग्राम ) आइरन का ऑक्साइड हाओ और आयुर्वेद में इसका उपयोग अधिक मात्र में किया जाता है क्यूंकी ये क्रोनिक बीमारियो के इलाज और फंडू रोग या अनेयमिया को नष्ट करने के लिए किया जाता है।
  • बुंग भस्म (१० मिलीग्राम )इसे हल्का,दस्तावर,रूखा,गरम,पितकरक,मान गया है। इसे प्रमुख रूप से कफ,कृमि,पांडु और श्रवास रोगो में प्रयोग किया जाता है।
  • असगंद( ५० मिलीग्राम )अश्वगंधा को असगंद नाम से जाना जाता है। इसकी जड़ को सुखकर पाउडर बनाकर वाट कफ,बलवर्धक रसायन की तरह प्रयोग किया जाता है।
  • गोखरू( २५ मिलीग्राम )ये आयुर्वेद सबसे प्रमुख ओषधि है क्यूकी ये पेशाब के रोगो एवं पुरुषो के योन कमजोरी के लिए प्रयोग में लिया जाता है।
  • कौच बीज (९० मिलीग्राम)इसके सेवन से टेस्टोस्टेरोन ,लुटिनीसिंग आदि में प्रयोग में लिया जाता है। मनशिक तनाव,नसो की कमजोरी,की एक अछि ओषधि है।
  • सौठ,मिर्च ,पिपली (१० मिलीग्राम )ये आम दोष जैसे विषाक्त और अपशिस्त को दूर करता है। ये बेहतर पाचन में सहायता करता है और यकृत को उटेजित करता है।
  • मूसली(२५ मिलीग्राम)ये पुरुष प्रजनन प्रणाली को दुरुस्त करती है। मूसली की जड़ो में पुरुषो की योन की कमजोरी के लिए एक पोशाक या टॉनिक के रूप में कार्य करती है।
  • शुद्ध शिलाजीत (५० मिलीग्राम) शुद्ध शिलाजीत पुरुषों में शुक्राणुओ की संख्या बढ़ाता है। ये पुरुषो के प्रमेह की अत्यंत आतम दवा है।जो योन विकारो के उपचार के लिए इसतमाल किया जाता है।
  • अभ्रक भस्म १० मिलीग्राम
  • स्वर्ण मक्षिक भस्म १० मिलीग्राम
  • यशद भस्म ४० मिलीग्राम
  • मुक्ता पिसती १० मिलीग्राम
  • जायफल २० मिलीग्राम
  • दालचीनी २० मिलीग्राम
  • जावित्री १० मिलीग्राम
  • केसर २० मिलीग्राम
  • मंजीत १० मिलीग्राम
  • अनंत मूल १० मिलीग्राम
  • ब्रहमी १० मिलीग्राम
  • स्वर्ण भस्म १० मिलीग्राम
  • त्रिफला चूर्ण ६० मिलीग्राम
  • भूमि आमला १० मिलीग्राम

औषधीय कर्म (Medicinal Effect of Rajvaidhya Rasayan Vati )

राजवैध रसायन वटी में निम्नलिखित औषधीय गुण है:

१) रसायन द्रव्य जो शरीर क बीमारियो में रक्षा करे साथ ही वृद्धवस्था को दूर रखने में सहायक हो ।
२) शोथहर द्रव्य जो शोथ या शरीर में सूजन को दूर कर।
३) वृष्य वा वाजीकरणद्रव्य जो रति शक्ति में वृद्धि करता है।जो बलकरक बाजीकरक और व्रीयवर्धक हो।
४) शुक्रजनन,शुक्रस्तम्भन, शुक्रशोधन द्रव्य जो शुक्र का पोषण करे।
५) रक्त प्रसाधन द्रव्य जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बूस्टर हो ।

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राजवैध रसायन वटी के लाभ (Benefits of Rajvaidhya Rasayan Vati in Hindi)

१) ये शारीरिक कमजोरी को दूर करने उपयोगी माना गया है।
२) यह मर्दाना कमजोरी को दूर करने में सहायक है।
३) इरेक्टाइल डिसफंक्शन
४) नपुंसकता
५) शीघ्रपतन
६) स्वप्नदोष
७) ये क्षीण प्रतिरोधक क्षमता में कमी
८) ये मानसिक दुर्बलता को ठीक करता है।
९) ये तनाव व चिंता से बचाता है।

औषधीय लाभ एवं प्रयोग (Benefits ans Uses of Rajvaidhya Rasayan Vati in Hindi)

राजवैध रसायन वटी के सभी घटकों का प्रभाव मर्दाना रोगों में दिखाई पड़ता है। यह शारीरिक कमजोरी को दूर करती है। यह पुरुषों नई ऊर्जा का संचार करती है और मर्दाना शक्ति की वृधि करती है। यह पुरुषों के स्वास्थ्य के उपयोगी व हितकारी आयुर्वेडिक औषधि है। यह पुरुषों के रोगों के उपचार के लिए एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है। प्रत्येक घटक के प्रभाव का प्रदर्शन करने के लिए यहाँ कुछ महत्वपूर्ण लाभ एवं औषधीय प्रयोग लिखे है।

#१. मर्दाना कमजोरी

राजवैध रसायन वटी का मुख्य घटक शिलाजीत है जो पुराने समय से ही मर्दाना कमजोरी के उपचार के लिए प्रयोग में लाया जा रहा है। यह शरीर की कोशिकायों को मजबूत बनाता है और अश्वगंधा के साथ मिलकर मर्दाना कमजोरी को दूर कर पुरुषीय शक्ति को बढ़ाता है।

#२. अल्पशुक्राणुता (वीर्य में शुक्राणुओं की कमी होना)

रसायन वटी में मौजूद अश्वगंधा और शुद्ध शिलाजीत पुरुषों में शुक्राणुओ की संख्या बढ़ाता है। इसलिए इस का प्रयोग अल्पशुक्राणुता के उपचार के लिए भी किया जाता है।

#३. स्वप्नदोष

रसायन वटी स्वप्नदोष के लिए भी लाभदायक है। यह स्वप्नदोष के कारण उत्पन हुई निर्बलता को दूर कर बृहण का कार्य करती है और नष्ट हुई ऊर्जा को पूर्ण करने में सहायक है। अच्छे परिणाम के लिए इस रोग में इसका प्रयोग शिरीष बीज चूर्ण, आमलकी रसायन, मुलेठी चूर्ण, और शतावरी के साथ अधिक हितकर है। यह सभी जड़ी बूटियों बराबर मात्रा में मिलाकर आधा चम्मच सुबह और शाम को लें। साथ में ही रसायन वटी और चंद्रप्रभा वटी का सेवन करें।

#४. इरेक्टाइल डिसफंक्शन

पुरुषों में जननांग की अक्षमता के कारण इरेक्टाइल डिसफंक्शन होता है। ज्यादा शराब उपभोग, थकान, तनाव और प्रदर्शन की चिंता आदि भी इसके कारण हो सकते है। इन सभी कारणों में रसायन वटी अति लाभकारी है। इसका प्रयोग कौंच पाक के साथ करने से बहुत लाभ मिलता है।

#५. इम्युनिटी बढ़ाने के लिए

रसायन वटी शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए बेहतरीन उत्पाद है। इकसे घटक ख़ास तौर पर अश्वगंधा, भूमि आमला और शिलाजीत रोग प्रतिरोधक क्षमता बूस्टर है।

राजवैध रसायन वाटी के उपयोग (Uses of Rajvaidhya Rasayan Vati in Hindi)

१) एनर्जि,स्टेमिना की कमी को दूर करना ।
२) डिप्रेशन,अवसाद से छुटकारा ।
३) एंग्जाएटी irritability and sleepness से दूर करे।
४) शरीर के मांसपेसियों में दर्द को कम करे।
५) भूख न लगना ,खून की कमी ,असमय बुढ़ापा आने से बचना।
६) प्रमेह

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रसायन वटी के औषधीय मात्रा (Dosage of Rasayan Vati)

१-२ गोली
दवा लेने का उचित समय है सुबह और शाम,गुनगुने पानी या दूध के साथ
उपचार की अवधि (कितने समय तक लें) कम से कम 3 महीने चिकित्सक की सलाह लें
आप के स्वास्थ्य अनुकूल रसायन वटी की उचित मात्रा के लिए आप अपने चिकित्सक की सलाह लें।

रसायन वाटी के दुष्प्रभाव एवं सावधानीय (Side Effects and cautions of Rajvaidhya Rasayan Vati in Hindi)

रसायन वटी का प्रयोग व सेवन निर्धारित मात्रा (खुराक) में चिकित्सा पर्यवेक्षक के अंतर्गत किया जाए तो रसायन वटी के कोई दुष्परिणाम नहीं मिलते।इसे बच्चो से बचा कर रखे। इसके सेवन के दौरान पीतत्वरधक और गरिष्ठ भोजन का सेवन न करे। कुलथी का प्रयोग इसके समय के दौरान नहीं करना चाहिए।

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