चिकनगुनिया

चिकनगुनिया (Chikungunya) एक प्रकार का वाइरस है जो मच्छर के काटने से फेलता है जो बहुत ही कष्ट दायक रोग है,इसे लोग हड्डी टूटने जैसा दर्द भी बोलते है। चिकनगुनिया एक अफ्रीकी शब्द है। जोड़ो को पीड़ा देने वाला ये रोग व्यक्ति को इतना कमजोर कर देता है की वो कोई भी काम नहीं कर पता। ये रोग एडीज मच्छर एइजिप्टी के काटने के कारण होता है। इस रोग से होने वाले जोड़ो के दर्द के लक्षणों के कारण रोगी के झुके शरीर को देखते हुए प्रचलित हुआ है।

चिकनगुनिया फेलाने वाले मच्छर जब किसी व्यक्ति या बंदर को काटते है उसकी लार मे ये  वाइरस पहुच जाता है। फिर ये संग्राहक मच्छर जब किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो वो व्यक्ति भी इस रोग का शिकार बन जाता है। एक बार इस रोग एसई पीढ़ित होने पर अगले 7 से 10 दिन तक व्यक्ति रोग फ़ेलाने की क्षमता रखता है।ये बी एक प्रकार से डेंगू से होने वाले कारण से ही मिलता जुलता बुखार है ,जो मच्छरों के पनपने से और जहा आप रहते हो वहा आसपास गंदगी की वजह से या फिर पानी के जेएएमए होने से।

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चिकनगुनिया के लक्षण – Chikungunya  Symptoms in Hindi  

ये मच्छर के काटने के 2 से 7 दिनो के बाद ही चिकनगुनिया के लक्षण नजर आते है।जैसे की बहुत ठंड लगने के  बाद तेज बुखार आता है,सिर में दर्द होना,मांसपेसियों में भी दर्द का होना,जोड़ो मे सूजन और तेज दर्द, जी मचलना जैसे की हर वक्त उल्टी जैसे मन का करना,इससे भूक भी कम लगने लगती है। कमजोरी का आना,लाइट  या प्रकाश सहन नहीं होना,शरीर पर चकते भी निकालने लगते है।ज्यादा तर रोगी मे शरीर में दर्द और सूजन की परेशानी 7 से 10 दिन के लिए होती है।गुर्दे की परेशानी,बॉडी मे पानी की कमी ।  

Complete blood काऊन्ट

चिकनगुनिया का निदान या DIAGNOSIS कैसे किया जाता है:

चिकनगुनिया का DIAGNOSIS के लिए हमे डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है,वो एस बीमारी का पता निम्न तरीको से करते है जैसे की-

1) Complete blood काऊन्ट (CBC टेस्ट)

ये एक प्रकार का ब्लड टेस्ट होता है जिसमे अगर wbc (white blood cell)और platelet count मे कमी आने पर चिकनगुनिया होने की शंका होती है।

2) Reverse transcriptase-polymerase chain reaction (RT-PCR)टेस्ट-इस रक्त

इस टेस्ट में चिकनगुनिया के GENE की जांच होती है।

3) VIRUS ISOLATION

संकर्मण के शुरुआत के दिनो मे रक्त से चिकनगुनिया के वाइरस को अलग कर परीक्षण करने के लिए यह जाँच की जाती है।

4) ENZYME-Linked immunosorbent assays(elisa)टेस्ट

इस रक्त जाँच मे चिकनगुनिया के antibodies रक्त में है या नहीं यह जाँच की जाती है। पीढ़ित व्यक्ति को डेंगू है या चिकनगुनिया यह इस जाँच पता चल जाता है।

चिकनगुनिया का उपचार – Chikgunya treatment in Hindi

कैसे किया जाता है इस बात की जानकारी होना जरूरी है। चिकनगुनिया के विषाणु शरीर के अंदर नास्ट करने के लिए कोई मैडिसिन फिलहाल नहीं आई है पर डॉक्टर चिकनगुनिया के उपचार के लिए लछनिक दवा /symptomatic treatment देते है ,और जोड़ो के दर्द के लिए अन्य दवा लेते है जिससे रोगी को दर्द मे कुछ आराम हो। बुखार आने के बाद बुखार कम करने के लिए पैरासेटामॉल दवा भी देते है।

चिकनगुनिया में रोगो को बहुत आराम  करना चाहिए और पानी अधिक से अधिक पीनी चाहिए। पर्याप्त मात्र। में आहार लेना चाहिए जिससे की आपको इस बीमारी से लड़ने के लिए शक्ति मिले। ऐसे तो ज्यादातर रोगी घर पर दवा लेकर और आराम कर ठीक ही सकते है पर लक्षणो में विरधी होने पर असतपताल मे दाखिल होना पड़ता है। चिकनगुनिया के लक्षण नज़र आने पर मेडिकल से दवा लेने की जगह डॉक्टर की सलाह के अनुशार सही डोज़ में ले।

Complete blood काऊन्ट

चिकनगुनिया से बचने के लिए precaution या एहतियात बरतना

चिकनगुनिया मच्छर के काटने से फेलता है और इसलिए चिकनगुनिया से बचने के लिए कुछ ईटी इतिहात बरतने की जरूरत है हम चीकनगुनिया के मच्छर से दूर रेह सकते है। घर के अंदर और आसपास पानी जमा न होने दे। कोई भी बर्तन में खुला पानी जमा न होने दे।घर के बर्तन को खाली रखे साथ ही उसे उल्टा कर के रखे जिससे मच्छर न पनपने नहीं।

अगर किसी चीज में आप हमेशा पानी जमा कर के रखते है तो पहले उसे साबुन और पानी से अचे से धो कर हमेशा रखे। घर में किटनाशक दवा का  चिरकाव कराते रहे। कूलर का कम ना होने पर उसमे जमा पानी को हटा देना चाहीये हमेशा साफ रखना चाहिए पानी बदलना चाहिए जिससे मच्छरो को पनपने का अवसर ना मिले। किसी भी घड्डे या गमले में पानीजमा ना हों दे। खिड़की और दरवाजो मे जाली लगाकर रखे शाम को दरवाजे बंद रखे।

रात को मच्छरदानी लगाकर सोये। अगर बच्चे खुले मे जाते हो तो उन्हे mosquito repellent क्रीम लगा कर ही भेजे। हमेशा बाहर जाए तो पूड़े कपड़े पहन कर जाए जिससे आप बच सके। सबसे ज्यादा वैसे जगह पर ना जाए जहा पहले से ही चिकनगुनिया या डेंगू फेला हुआ हो।इन सब बाटो का डायएन आपको हमेशा ररखनी चाहिए जिससे आपको आगे जीवन में कोई भी परेशानी का सामना ना करना पड़े।

आयुर्वेद में भी इसका इलाज है पर अगर आप घर में ही थोड़ा precaution ले तो एस बीमारियो से लढ सकते है।

आयुर्वेद मे विल्वदी गुलिका,सुदर्शन गुलिका और अमृतरीसठाव दिया जाता है। लेकिन ये दवाओ को अपनाने से पहले किसी अनुभव चिकित्सक से परामर्श जरूर ले।

चिकनगुनिया से बचने के लिए precaution या एहतियात बरतना

चिकनगुनिया के घरेलू उपचार – Chikungunya Home Remedies in Hindi

चिकनगुनिया से लड़ने के लिए कुछ घरेलू उपाय अपनाने जरूरी होते है जिससे आपको लड़ने क ताकत मिले और आप स्वस्थ हो जाए-

१) पपीते की पत्ती(papaya leaf ke upyog in hindi)

पपीते की पत्ती न केवल डेंगू बल्कि चिकनगुनिया मे भी उतनी ही प्रभावी है। बुखार में शरीर के प्लेटलेट्स (platelates) तेजी से गिरते हैं, जिन्हें पपीते की पत्तियां तेजी से बढ़ाती हैं। मात्र तीन घंटे में पपीते की पत्तियां शरीर में रक्त के प्लेटलेट्स को बढ़ा देती हैं। उपचार के लिए पपीते की पत्तियों से डंठल को अलग करें और केवल पत्ती को पीसकर उसका जूस निकाल लें। दो चम्मच जूस दिन में तीन बार लें।इससे आपको जरूर फाइदा मिलेगा।

Gharelu nushke chikungunya ke liye

२)तुलसी और अजवायन (Tulsi and Ajwain के fayde in hindi)

तुलसी और अजवायन भी चिकनगुनिया के उपचार के लिए बेहद अच्छी घरेलू औषधि हैं। उपचार के लिए अजवायन, किशमिश, तुलसी और नीम की सूखी पत्तियां लेकर एक गिलास पानी में उबाल लें। इस पेय को बिना छानें दिन में तीन बार पीएं।

३)लहसुन और सजवायन की फली (Garlic and drum stick ke fayde in hindi)

लहसुन और सजवायन की फली चिकनगुनिया के इलाज के लिए बहुत बढ़िया है। चिकनगुनिया में जोड़ों में काफी दर्द होता है, ऐसे में शरीर की मालिश किया जाना बेहद जरूरी है। इसके लिए किसी भी तेल में लहसुन और सजवायन की फली मिलाकर तेल गरम करें और इस तेल से रोगी की मालिश करें।क्यूकी लहसुन का उपयोग अक्सर जोड़ो के दर्द को दूर करने के लिए किया जाता है।  

लहसुन chikungunya treatment in hindi

४)लौंग (Laung or clove ke fayde in hindi)

दर्द वाले जोड़ों पर लहसुन को पीसकर उसमें लौंग का तेल मिलाकर, कपड़े की सहायता से जोड़ों पर बांध दें। इससे भी चिकनगुनिया के मरीजों को जोड़ों के दर्द से आराम मिलेगा, और शरीर का तापमान (body temprature) भी नियंत्रित होगा।

५)एप्सम साल्ट (Epsom salt ke fayde in hindi)

एप्सम साल्ट की कुछ मात्रा गरम पानी में डालकर उस पानी से नहाएं। इस पानी में नीम की पत्तियां भी मिलाएं। ऐसा करने से भी दर्द से राहत मिलेगी और तापमान नियंत्रित होगा।

६)अंगूर (Grapes ke upyog chikangunya ke liye in hindi)

अंगूर को गाय के गुनगुने दूध के साथ पीने पर चिकनगुनिया के वायरस मरते हैं लेकिन ध्यान रहे अंगूर बीजरहित हों।यह उपाय चिकनगुनिया के गांबिर लक्षण जैसे दर्द और बुखार में आराम दिलाता है। अंगूर में मोजूद फ़िनालिक योगिक मे एंटीओक्सीडेंट औरएंटीव्यराल गुण होते है।जो इससे लढने की शक्ति देता है।

Grapes ke upyog chikanguniya ke liye

७) गाजर (Carrot ke fayde in hindi )

कच्ची गाजर खाना भी चिकनगुनिया के उपचार में बेहद फायदेमंद है। यह रोगी की प्रतिरोधक क्षमता (immunity power) को बढ़ाती है साथ ही जोड़ों के दर्द से भी राहत देती है।

८) हल्दी(haldi ke upyog in hindi)

चिकनगुनिया से लड़ने के लिए हल्दी भी बहुत फायदेमंद है क्यूकी हल्दी में एंटीओक्सीडेंट है जो सूजन कम करने में लाभकर है। एक ग्लास गुङ्गुने दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाये। इसे रोज सुबह और शाम को नियमित रूप से ले।

९)लाल मिर्च के उपयोग in हिन्दी

लालमिर्च में केप्सेसीन भरपूर मात्रा में होती है जो सूजन कम करने के लाभदायक है। पानी में ३ बड़े चम्मच लालमिर्च को ५ से १० मिनट के लिए double boiler पर गरम करे। अब इसमे आधा कप मोम मिलाये और लगातार चलाते रहिए।अब इस मिश्रण में १ कप जैतून का तैल मिक्स करे और १० मीन फ्रीज़ में छोड़ दे। फिर जहा दर्द हो वह लगाए।

१०)विटामिन सी अधिक लें (Increase intake of Vitamin C)

चिकनगुनिया के दौरान होने वाले दर्द को दूर करने के लिए विटामिन सी युक्त आहार अधिक लेना चाहिए। इस समय संतरा, कीवी , पपीता, विटामिन सी की गोलियां आदि खाने से काफी आराम मिलता है।

चिकनगुनिया के घरेलू उपचार

११)मसाज (Massage for Joint Pain During Chikungunya)

प्राकृतिक तेलों से मसाज करने से भी चिकनगुनिया के दर्द में राहत मिलती है। दर्द वाली जगह पर हल्के गर्म तेलों या कपूर, नारियल और लहसून को मिलाकर बनाए गए तेल की देर तक मसाज करनी चाहिए।

चिकनगुनिया का प्राथमिक उपचार  – Primary Treatment of Chikungunya in Hindi

-अधिक से अधिक पानी पीएं, हो सके तो गुनगुना पानी पीएं।

-ज्यादा से ज्यादा आराम करें।

-चिकनगुनिया के दौरान जोड़ों में बहुत दर्द होता है जिसके लिए डाॅक्टर की सलाह पर ही दर्द निवारक (Pain Killer) लें।

-दूध से बने उत्पाद, दूध-दही या अन्य चीजों का सेवन करें।

-रोगी को नीम के पत्तों को पीस कर उसका रस निकालकर दें।

-रोगी के कपड़ों एवं उसके बिस्तर की साफ-सफाई पर खास ध्यान दें।

-करेला व पपीता और गिलोय के पत्तों का रस काफी फायदेमंद माना जाता है।

-नारियल पानी पीने से शरीर में होने वाली पानी की कमी दूर होती है और लीवर को आराम मिलता है।

-ऐस्प्रिन बुखार होने पर कभी ना लें, इससे काफी समस्या हो सकती है।

चिकनगुनिया में बच्चों की देखभाल – Chikungunya se bacho ko kaise bachae in hindi 

बच्चों का खास ख्याल रखें। बच्चे नाजुक होते हैं और उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है इसलिए बीमारी उन्हें जल्दी पकड़ लेती है। ऐसे में उनकी बीमारी को नजरअंदाज न करें।बच्चे खुले में ज्यादा रहते हैं इसलिए इन्फेक्शन होने और मच्छरों से काटे जाने का खतरा उनमें ज्यादा होता है।बच्चों घर से बाहर पूरे कपड़े पहनाकर भेजें।

मच्छरों के मौसम में बच्चों को निकर व टी – शर्ट न पहनाएं। रात में मच्छर भगाने की क्रीम लगाएं।अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, लगातार सोए जा रहा हो, बेचैन हो, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रैशेज हों, उलटी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं।आमतौर पर छोटे बच्चों को बुखार होने पर उनके हाथ – पांव तो ठंडे रहते हैं लेकिन माथा और पेट गर्म रहते हैं इसलिए उनके पेट को छूकर और रेक्टल टेम्प्रेचर लेकर उनका बुखार चेक किया जाता है। बगल से तापमान लेना सही तरीका नहीं है, खासकर बच्चों में। अगर बगल से तापमान लेना ही है तो जो रीडिंग आए, उसमें 1 डिग्री जोड़ दें। उसे ही सही रीडिंग माना जाएगा।

चिकनगुनिया हमारे शरीर को बहुत कमजोर कर देता है तो जररूरी है की हम थोड़े सी सावधानी बरते और खानपान ठीक करे और अपना घ्यान रखे जैसे हम अपने बच्चो का रकते है। क्यूकी अगर हम स्वस्थ नहीं रहेगे तो हमारे बच्चे कैसे स्वस्थ रहेगे।

  

 

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