नीम (neem) हमारे जीवण में प्राचीन काल से ही एक ओषधीय पेड़ है`। इसका उपयोग आयुर्वेदिक और होमेओपैथिक दवाओ में तो किया ही जाता है पर अंग्रेज़ी एवम ओर्गेनिक दवाईया या त्वचा संबंधित फ़ेसवॉश एवम कई पर्द्धार्थों में भी किया जाता है,इसलिए तो इसे योगीकगुण से भरपुर माना जाता है,जो की विभिन्न प्रकार के रोगो को जैसे मधुमेह,रक्तशुद्ध,एंटीवाइरल,बुखार,चेचक,त्वचा रोग में ऐंटीसेप्टिक का काम करते है।

नीम के पेड़ का प्रत्येक भाग जैसे तना,छाल,जड़,बीज़ का तेल इत्यादि सभी भागो को आयुर्वेदिक दवाए बनाने में प्रयोग किया जाता है। नीम के विभिन्न सरल एवं लाभदायक उपयोग है,जो हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी है ।

नीम के फायदे ( Neem ke fayde in Hindi)

#1. नीम के उपयोग त्वचा के लिए

नीम एक एंटीसेप्टिक है जो हमारे त्वचा के रोगो के जैसे कील,मुहासे,चकते,टेनिंग एकजीमा जैसे रोगो को रोकने के लिए उपयोगी है।

उपाय करने का तरेका

१)1/3 कप जेतून या नारियल का तेल में एक चम्मच नीम का तेल अच्छी तरह से मिलाकर शरीर में लगाने से चमक आती है और किसी भी प्रकार की त्वचा रोग नहीं होती।

२)चेहरे या शरीर पर किसी  भी प्रकार की त्वचा संबंधित बीमारी के लिए नीम की कुछ पत्तिया का पेस्ट बिना पानी डाले बना ले ,और सुबह शाम त्वचा पर १५ मिनट के लिए लगाए फिर ठंडे पानी से धो ले। इसका प्रयोग नियमित रूप से करे आराम मिलेगा। नीम

#2. नीम रूसी के लिए (Rusi ke liye neem ka prayog)

नीम में फंग्स और जीवाणु रोधी गुण होते है जो आपके बालो को स्वस्त रखते है। इससे आप के बालो का सूखापन एवं खुजली में भी लाभ मिलेगा।

उपाय करने का तरेका

नीम की २०-३० पत्तियों में ५०० मिली पानी डालकर उबालना है ,१०-१५ मिनट उबालने के बाद (पत्तियों का रंग पानी में उतर नहीं आता)उसे ठंडा होने दे। अब नहाते समय शैम्पू से बाल धोने के बाद नीम के इस पानी से बाल धोए।ऐसा सप्ताह में २ बार करे बालो को इससे विशेष लाभ मीलेगा।

#3. नीम बाल मे से जू दूर करने का उपाय

नीम के बीज मे किटाणु नाशी गुण होते जिससे की सिर के जुओ को १० दिनो में खत्म कर देता है,ऐसा परीजीवी विज्ञान अनुसंधान द्वरा सन २०१२ में प्रकाशित एक पत्रिका मे बताया गया है।

उपाय करने का तरेका

नीम के पत्तियों का पेस्ट तयार कर बालो में अच्छी तरह से लगाए,आधे घंटे बाद गुंगुने पानी धोले,उसके बाद ज़ू कंघी से बाल बाए।

नीम के बीज का तेल जो किसी भी आयुर्वेदिक की दुकान मे आसानी से मिल जाता है उसे ३० दिनो तक बाल मे लगाए।

नीम

#4. नीम मसुरों की लिए

मसूढ़ो की बीमारी जैसे की  मसूरों का कटना ,सूजन,खून आना,नाजूक मसुरे से दातो का हिलना आजकल आम बीमारी हो गई है। नीम इसके लिए भी एक गूणकारी  ओषधि है।

उपाय करने का तरेका

नीम के ताजा पते का रस निकालकर या नीम का तेल को सुबह अपने दातोमे मालिश करे,२-३ मिनट तक छोड़ दे फिर दातों को गुंगुने पानी से कुला करे,मसूरों की सभी समस्याओ से आराम मिलेगा। सुबह ब्रश की जगह नरम नीम के दातून का इस्तेमाल करे नीम के पतो को पानी में उबालकर उस पानी का आप

माउथवास के लिए भी उपयोग कर सकते है |

#5. नीम रक्त शुद्ध करने में

नीम एक गुणकारी रक्तशोधक और विशंषक औषधि है | यह शरीर के सभी भागों में आवश्कयक तत्त्व और ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है | रक्त की किसी भी प्रकार की समस्या से परेशान होने पर बिलकुल चिंता की जरुरत नहीं है |

उपाय करने का तरेका

नीम की ताज़ा कोमल पत्तियों को शहद या मुनक्के के साथ सुबह ख़ाली पेट कुछ हफ्ते तक सेवन करने से रक्त शुद्ध हो जाता है और मनुष्य को शरीर ऊर्जावान हो जाता है |

सुबह चाय में एक नीम की पत्ती मिलाकर पीने से रक्त साफ़ होता है |

ज्यादा परेशानी होने पर किसी अच्छे चिकित्सक की सलाह लेकर नीम की आयुर्वेदिक गोलियों को इस्तेमाल खाना खाने के पहले कर सकते हैं |

नीम

#6. मधुमेह

नीम में मौजूद यौगिक तत्त्व रक्त शर्करा को रोकने के लिए रामबाण इलाज हैं| मधुमेह कितना भी पुराना हो चूका हो या शुरूआती चरण में हो ,यह रोगी की इन्सुलिन आवश्यकता को पूरी तरह ख़तम कर देता है |

उपाय करने का तरेका

मधुमेह की रोकथाम के लिए प्रतिदिन सुबह ख़ाली पेट नीम की कोमल पत्तियां चबाकर खाने से लाभ होता है |

नीम की पत्तियां छाया में सुखाकर उसका बारीक़ चूर्ण तैयार कर लें और सुबह शाम एक कप गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से कई सालों पुराना डॉयबिटीज़ भी ख़तम हो जाता है |

किसी अच्छे आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेकर नीम की आयुर्वेदिक गोलियों का इस्तेमाल भी लाभकारी होता है |

#7. नीम गठिया (आर्थराइटिस) का उपचार

गठिया रोग के लिए नीम का तेल लाभकारी औषधि है | पुराने से पुराने गठिया का दर्द या शरीर के किसी भी भाग के जोड़ो का दर्द , पीठ का दर्द इत्यादि के लिए कप पानी में एक मुट्ठी नीम की पत्तियों और फूलों को उबालकर ठंडा करे, इस पानी को सुबह शाम दिन में दो बार लगातार महीने तक सेवन करने से सभी प्रकार के गठिया एवं जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है |

उपाय करने का तरेका

नीम के आयुर्वेदिक तेल की मालिश घुटनो कमर पीठ में नियमित रूप से करने में सभी गठिया दर्द में आराम मिलता है

#8. नीम पेट के कीड़े

जैसा की पहले बताया गया है नीम एक एंटीबायोटिक औषधि भी है | पेट में कीड़े होने की अवस्था में सुबह शाम नीम के कुछ कोमल पत्तों को चबाकर खाना चाहिए साथ में चाय के साथ नीम की पत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है

विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेकर पेट के कीड़ों के लिए नीम की आयुर्वेदक कैप्सूल्स का भी सेवन कर सकते है

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#9. नाखून संक्रमण

नीम के एंटीबॉयोटिक गुणों के कारण इसे हाथ एवं पैरों के नाखून संक्रमण को रोका जा सकता है |  नीम के तेल का दिन में २ बार हाथ एवं पैरों के नाखूनों में लगाने से नाखून संक्रमण से बचे रहते है |

नाखून में नीम का तेल लगाने से नाखून जड़ से मजबूत और सुन्दर बने रहते हैं

#10. नीम कटने या घाव होने पर

शरीर पर किसी भी प्रकार की खुली चोट या घाव होने या कटने पर नीम के पेड़ की छाल को घर लाकर धूप में सूखा ले , सूखने के बाद उसका बारीक़ चूर्ण तैयार करे और उसे नीम के तेल या सरसो के तेल के साथ घाव पर लगा देने से घाव जल्दी सूखता है और उसके बढ़ने की कोई आशंका नहीं रहती |

नीम के नुकसान (Neem ke nuksan in Hindi)

सामान्य रोगी की खुराक में नीम का उपयोग कोई विशेष नुकसान नहीं देता | लेकिन छोटे बच्चों एवं स्तन पान कराने वाली औरतों या प्रेग्नेंट लेडीज को नीम की खुराक नहीं देना चाहिए | इसके साथ ही नीम के तेल को कभी पीना या खाना नहीं चाहिए |

इस प्रकार ऊपर दिए अनुसार गुणकारी नीम का इस्तेमाल कर आप विभिन्न रोगो से छुटकारा पा सकते हैं | हां पत्तियां अवश्य करवी होती है पर कुछ पाने के लिए कुछ तो खोना तो परता है।नीम की पत्तियों को पानी में उबाल उस पानी से नहाने से चर्म विकार दूर होते हैं और ये खासतौर से चेचक के उपचार में सहायक है और उसके विषाणु को फैलने न देने में सहायक है।नीम की पत्तियों को चेचक रोगी के पास रखना चाहिए,अगर खुजली होए तो नीम की पत्तियों से उसे सहलाना चाहिए। इसलिए तो नीम को एक प्रकार का वनस्पति पेड़ भी कहा जाता है।

 

 

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