Piles ke symptoms and gharelu upay in hindi

बवासीर एक बहुत ही दुख और दर्द देने वाला रोग होता है जिसमें अत्यधिक दर्द होने के कारण रोगी बहुत अधिक परेशान और दुखी हो जाता है।आजकल के अनुचित जीवन शैली और अनुचित आहार के कारण बवासीर होता है। सही आहार और सही जीवन शैली अपनाने से न केवल बवासीर के इलाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है और भी हम कई प्रकार की बीमारियो से लड़ सकते है। बवासीर में गुदा के अंदर और गुदा के आसपास की जगह पर सूजन हो जाती है।

गुदा नलिका बड़ी आंत का अंतिम भाग है और लगभग 3-4 सेमी लंबा होता है जो गुदा नलिका के निचले सिरे पर बाहर की ओर खुलता है जिसके माध्यम से मल पास होता है।बवासीर के दोरान बहुत कष्ट  होता है साथ ही मल त्याग के दौरान ब्लीडिंग होती है। गुदा से एक बलगम जैसा स्राव भी निकलने लगता है। इसमे इंसान बहुत तकलीफ़ों से गुजरता है किसी किसी को तो बैठने तक में परेशानी होनी लगती है जब पैलेस बहुत अधिक बढ़ जाता है।

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बबासिर के लक्षण इन हिन्दी (Piles ke symptoms in Hindi)

बवासीर जब होता है तब रोगी को पहले नहीं पता चलता। वो इसे आम बात समझते है। लेकिन जब वो जरूरत से ज्यादा बढ्ने लगता है तब रोगी को पता चलता है तो ये बात सही नहीं होती। तो आए चले जाने बवासीर होने के क्या क्या लक्षण है जिससे हम पहले से आगाह होजाए और समय पर ही इलाज कर ले।

  • गुदा से एक बलगम जैसा स्राव निकलना।
  • मल त्याग के दौरान ब्लीडिंग होना।
  • दर्दनाक मल त्याग जिससे मलाशय या गुदा को चोट पहुंच सकती है।
  • आत गुदा के पास एक दर्दनाक सूजन या गांठ या मस्से का होना।
  • गुदा क्षेत्र में खुजली, जो लगातार यारुक रुक कर हो सक।

बबासिर के प्रकार 

मुख्य रूप से बवासीर दो प्रकार की होती है – आंतरिक और बाहरी।

#1. आंतरिक बवासीर 

आंतरिक बवासीर वो होती है जो गुदा नलिका के अंदर 2-3 सेंटीमीटर ऊपर होती है। आंतरिक बवासीर आम तौर पर पीड़ारहित होती है क्योंकि ऊपरी गुदा नलिका में कोई दर्द तंत्रिका फाइबर नहीं होता है।

आंतरिक बवासीर को उनकी गंभीरता और आकार के अनुसार ग्रेड 1 से 4 में वर्गीकृत किया जा सकता है –

  • Grade 1 आंतरिक बवासीर में गुदा नलिका की अंदरूनी परत पर हल्की सी सूजन होती है। इसमें दर्द नहीं होता है। ग्रेड 1 बवासीर आम है।
  • Grade 2 में सूजन थोड़ी अधिक होती है। मल त्याग करते समय ज़ोर लगाने पर खून के साथ मस्से भी बाहर आ जाते हैं। लेकिन मल त्याग के बाद ये मस्से अंदर चले जाते हैं।
  • Grade 3 में जब आप शौचालय में जाते हैं तो मस्सों के साथ साथ खून भी आता है। मल्त्यग करने के बाद उंगली से अंदर करने पर ये अंदर चलते जाते हानी।
  • Grade4 आंतरिक बवासीर में बहुत अधिक दर्द होता है। मल त्याग करते समय ज़ोर लगाने पर खून के साथ साथ मस्से भी बाहर आ जाते है लेकिन ये उंगली से अंदर करने पर भी अंदर नहीं जाते हैं। ये मस्से कभी-कभी बहुत बड़े हो जाते हैं।

#2. बाहरी बवासीर 

बाहरी बवासीर वो है जो गुदा नलिका के 2-3 सेंटीमीटर नीचे होती है। इसमें छोटे छोटे मस्से होते हैं जो गुदा की बाहरी परत पर होते हैं। बाहरी बवासीर दर्दनाक होती है क्योंकि गुदा नलिका के निचले हिस्से में दर्द तंत्रिका फाइबर होते हैं।

बवासीर के कारण – Piles Causes in Hindi

बवासीर बनने का कारण स्पष्ट नहीं है। गुदा नलिका की परत के भीतर नसों में होने वाले परिवर्तन को ही इसका कारण  माना जाता है कि कई मामलों में गुदा के अंदर और आसपास बढ़ता दबाव इसका एक प्रमुख कारण हो सकता है।

#1. कब्ज है बवासीर का कारण – Constipation Causes Piles in Hindi

कब्ज के कारण मल त्याग करते समय ज़ोर लगाने के कारण गुदा की नसों के अंदर और आसपास दबाव पड़ने के कारण बवासीर होता है। इसलिए जब भी आपको कब्ज की समस्या हो तो जल्दी से जल्दी इसका इलाज करें।

#2. बवासीर का कारण बनता है अधिक वजन उठाना – Piles Caused by Heavy Lifting in Hindi

अधिक बोझ उठाते समय साँस रोकने से गुदा पर शारीरिक तनाव पड़ता है जो नसों की सूजन का कारण बन सकता है जिससे पाइल्स की शुरुआत हो सकती है। इसके अलावा अधिक समय तक खड़े रहने और बैठे रहना भी पाइल्स का कारण हो सकता है। खांसी, छींकने और उल्टी के कारण पाइल्स और भी खराब हो सकती है।

#3. अधिक उम्र है पाइल्स का कारण – Piles Related to Age in Hindi

बूढ़े होने के कारण गुदा नलिका के अंदर के भाग के कमजोर पड़ जाने से बवासीर होता है।

#4.  बवासीर होने की वजह है गर्भावस्था – Piles Due to Pregnancy in Hindi

गर्भावस्था के दौरान बवासीर होना आम होते हैं। यह संभवतया गर्भ में बच्चे की वजह से पड़ने वाले दबाव के कारण होती है। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान हार्मोन में परिवर्तन भी इसका एक कारण हो सकता है।

#5. आनुवंशिक भी होती है बवासीर – Hemorrhoids are Genetic in Hindi

कुछ लोगों में पाइल्स की बीमारी आनुवंशिकता के कारण भी होती है। आनुवंशिक कारणों में बवासीर गुदा क्षेत्र में नसों की कमजोरी के कारण हो सकती है।

बवासीर को दूर करने के लिए घरेलू उपाय इन  हिन्दी (Piles treatment in Hindi)

१ ) १०० ग्राम किशमिश को रात भर पानी में डुबो कर रखे और फिर सुबह इसी पानी में किशमिश को मसल कर इस पानी का सेवन करे। कुछ ही दिन के निरंतर इस उपाय को करने से बवासीर ठीक होने लगती है।

२) बवासीर होने पर दही या लस्सी के साथ्न कच्चा प्याज़ खाने से बहुत फायदा मिलता है।

३) अगर constipation हो तो रोज ईसबगोल की भूसी का प्रयोग करने से पेट साफ हो जाता है जिससे बवासीर होने का खतरा नहीं होता ।

४) कोई भी बवासीर हो कच्ची मुली खाने से या इसका रस पीने से राहत मिलती है। एक बार में बस २५ से ५० ग्राम पिये तक ही ले।

५) ५० से ६० ग्राम बड़ी इलाइचि तवे पर भून कर और ठंडे होने के बाद इसे पीस कर चूर्ण बना ले। रोज सुबह खाली पेट पानी के साथ इस चूर्ण को ले । बवासीर में आराम मिलेगा।

६) आम और जामुन की गुठली के अंदर वाले हिस्से को सूखा कर पीस ले और इसका चूर्ण बना ले ।रोज सुबह एक चमच्च चूर्ण पानी के साथ या लस्सी के साथ लेने से खूनी बवासीर मे आराम मिलता है।

७) १० से १२ ग्राम धुले हुए काले तिल ताज़ा मक्खन के साथ खाने से बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।

८ ) अगर आपको बवासीर बार बार होती है तो दोफ्हर के खाने के बाद लस्सी का सेवन करे । लस्सी में थोड़ा सेंधा namak और अजवाइन मिलकर पिये।

९) 80 ग्राम अरंडी के तेल को गरम करे फिर इसमे 10 ग्राम कपूर मिलकर रखे। मस्सो को साफ पानी से धोकर किसी साफ कपड़े से पोछ कर फिर अरंडी के तेल से मस्सो पर हल्के हाथ से मालिश करे। सको दिन में 2 बार करने से मस्सो में सूजन और दर्द एवं जलन में आराम मिलेगा।

१०) खूनी और बादी बवासीर के लिए अंजीर का सेवन बहुत फायदेमंद  है।रात को सोने से पहले २ सूखे अंजीर पानी में भिगो कर रखे और सुबह खाये और २ अंजीर सुबह भिगो कर रख दे जिसे आप शाम को खाये। अंजीर खाने के आधा से पोना घंटा पहले और बाद में कुछ खाये पिये नहीं। १० से १२ दिन लगातार इस नुस्खे को करने से बवासीर में राहत मिलती

११) थोड़े से हल्दी को सेहुँड़ के दूध मे मिलकर इसकी १ बूंद मस्से पर लगाने से मस्सा ठीक हो जाता है।

१२) सहजन के पत्तों और आक के पत्तों का लेप लगाने से भी मस्सो से जल्द छुटकारा मिल जाता है।

१३) करवी तोरई के रस मे हल्दी और नीम का तेल मिला कर एक लेप बना ले और मस्सो पर लगाए है।

बवासीर के बचाव के उपाय – Prevention of Piles in Hindi

आपके पेट में जो भी समस्याएं होती है उसका प्रत्यक्ष और हानिकारक प्रभाव बवासीर की समस्या पर हो सकता है। अनुचित जीवन शैली और अनुचित आहार बवासीर का मुख्य कारण है। सही आहार और सही जीवन शैली बवासीर के इलाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

इसलिए उचित आहार का सेवन बवासीर की समस्या से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकता है और अनुचित आहार का सेवन आपकी बवासीर की समस्या को और बढ़ा सकता है तो उचित भोजन खाएं और बवासीर की समस्या से छुटकारा पाएं। यहाँ तक कि दवाइयां या उपचार तभी प्रभावी हैं जब आप उचित आहार और जीवनशैली का पालन करते हैं। यदि आप कष्टदायक और दर्दनाक बवासीर से छुटकारा पाना चाहते हैं तो नीचे दी गई जीवनशैली और आहार को अपनाएं जो आपको बवासीर की समस्या से छुटकारा दिलाने में मदद करेंगी।

#1. बवासीर में क्या खाना चाहिए – Healthy food for piles patient in hindi

बवासीर होने पर हमे सही भोजन को खाना चाहिए जिसमें बहुत फाइबर हो और आसानी से पच जाए जैसे ओट्स, मक्का, गेहूं आदि | इससे आपको बवासीर में बहुत फायदा होने मे मदद मिलेगी।

  • अंजीर, पपीता, केले, ब्लैकबेरी, जामुन, सेब और हरी पत्तेदार सब्ज़ियों का सेवन करें जो आंत के लिए बहुत अच्छी होती हैं।
  • सूखे मेवे जैसे बादाम और अखरोट आदि और ऐसे खाद्य पदार्थ जो लोहे (iron) से समृद्ध हैं उनका सेवन अपनी स्थिति के अनुकूल करें।
  • प्याज, अदरक और लहसुन भी बवासीर के इलाज में बहुत फायदेमंद होते हैं। शौच को मुलायम रखने के लिए द्रव
  • पदार्थ (liquid) का अधिक सेवन करें।
  • सब्जियों में पालक,गाजर,चुकंदर,टमाटर,तुरई,जिमिकन्द,मुली खाये।
  • करेले का रस और लस्सी और पानी भी फायदेमंद है।
  • दलिया,दही,चावल,मूंग की दल की खिचड़ी,देसी घी।
  • खाना खाने के बाद अमरूद खाना भी फायदेमंद है।
  • फल में केला,कच्चा नारियल ,आवला ,अंजीर,अनार,पपीता खाये।

#2. बवासीर में क्या नहीं खाना चाहिए – Food to avoid for piles patient in hindi

  • बवासीर से बचने के लिए हमे कुछ चीजों को से हमे परहेज करना परेगा जैसे की जंक फूड, धूम्रपान और शराब का सेवन ना करें।
  • दूध के उत्पाद कब्ज की समस्या को बढ़ा सकते हैं जिससे बवासीर की स्थिति और खराब हो सकती है तो डेरी उत्पादन के सेवन से बचें।
  • तेल, मसालेदार और बाजार में बिकने वाले तैयार खाद्य पदार्थ बवासीर के लिए हानिकारक होते हैं। इनके सेवन से बचें।
  • सफेद आटा या मैदा बवासीर की समस्या को कई गुना बढ़ा सकते हैं तो सफेद आटा या मैदा उत्पादों के सेवन से बचें।
    शराब ध्रूम पान से बचे।
  • मांस मछ्ली,उड़द की दल,बासी खाना,और खटाई ना खाये।
  • चाय ,काफी के सेवन से बचे।

#3. बवासीर के लिए व्यायाम – Physical exercise for piles patient in hindi

मोटापा तो हमारे स्वस्थ्य के लिए हानिकारक तो है ही साथ ही बवासीर आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। इसलिए स्वस्थ शरीर के लिए वजन को नियमित रखना बहुत ही महत्वपूर्ण है। स्वस्थ शरीर के लिए वजन को नियमित रखने के अलावा, कुछ  योगासन है जो बवासीर के लक्षणों को कम करने में बेहद फायदेमंद हैं।
जैसे-

  • भुजंगासन
  • धनुरासन
  • शवासन
  • उत्तान पादासन
  • पश्चिम उत्तानासन आदि

#4.  बवासीर के दर्द का इलाज करें सिट्ज़ स्नान से (Sitz bath good for piles in hindi)

सिट्ज़ स्नान (sitz bath) या हिप स्नान (hip bath) बवासीर से राहत और घावों को ठीक करने में बेहद फायदेमंद है। अच्छे परिणाम के लिए गुनगुने पानी में सेँधा नमक डाल कर कम से कम 10 मिनट के लिए उस पानी में पूरी तरह से अपने कूल्हों को डुबो कर रखें। दर्द और सूजन को कम करने के लिए स्नान से पहले पेट पर गुलमेहंदी के तेल से मालिश करें।

#5.  बवासीर का इलाज है कुछ अच्छी आदतें (Good habits for prevention of piles in hindi)

लंबे समय तक बैठने से बचें। बैठने के लिए कठोर सीट की बजाय नरम और आरामदायक सीट का उपयोग करें। -यौनसम्बन्ध से बचने की कोशिश करें।
उचित आहार खाएं, योगासन और ध्यान का अभ्यास करें और शांत और खुश रहें क्योंकि तनाव बवासीर की समस्या को बढ़ा सकता है।
अगर आप बवासीर यानि पाईल्स से परेशान है और इससे छुटकारा पाने के लिए आप ऑपरेशन करवाने का सोच रहे तो इससे पहले ऊपर दिये गए उपायो का प्रयोग करे। किसी आयुवेदिक वैध से सलाह ले। ये सब उपायो से आपकी परेशानी कम होनी ही चाहिए अगर नहीं हो तो आएए जाने की डाकटोर बवासीर से निदान दलाने के लिए क्या क्या करवाते है।
बवासीर का निदान मरीज़ का इतिहास लेकर और शारीरिक परीक्षा लेकर किया जाता है। इतिहास लेने के दौरान बवासीर के लक्षणों के बारे में पूछा जाता है – उदहारण के तौर पर कब्ज़, मल त्यागने में कठिनाई और मलाशय पर दबाव। और अन्य प्रश्न मलाशय से खून आने की वजह पता लगाने के लिए पूछे जा सकते हैं। मलाशय से खून आने के कुछ कारण हैं, ट्यूमर , पेट की सूजन  (inflammatory bowel disease) और जठरांत्र रक्तस्राव (gastrointestinal bleeding)।
शारीरिक परिक्षण निदान को पक्का करने के लिए किया जाता है जिसमें मलाशय परीक्षण शामिल है। इसमें उंगली द्वारा असामान्य गांठ का पता लगाया जाता है। अंदरूनी बवासीर को आमतौर पर महसूस नहीं किया जाता। अगर बहुत दर्द या सूजन होती है तो मलाशय परीक्षण को रोक दिया जाता है। इसके साथ साथ बवासीर और कब्ज़ की वजह से जुड़े के आस-पास की त्वचा फटने लगती है। इससे होने वाला दर्द और ऐठन मलाशय के परिक्षण को असुविधाजनक बना देता है।
अगर डॉक्टर को लगता है की मलाशय से खून आने का कारण बवासीर के अलावा कुछ और हो सकता है, तो वह अनोस्कोपी (Anoscopy)  करेंगे। अनोस्कोपी में प्रकाशित नली को गूदे में डाला जाता है, ताकि गूदे के अंदर देखा जा सके। अगर खून पेट की बाकी जगहों में से आता हैं तब सिग्मोइडोस्कोपी (Sigmoidoscopy) या कोलोनोस्कोपी (colonoscopy) कराइ जाती है। यह प्रक्रियाएं गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजिस्ट्स (gastroenterologists) या सर्जन द्वारा की जाती हैं।
ज़्यादातर मामलों में, बिना कोई इलाज किये बवासीर अपने आप ठीक हो जाता है। बहुत सारे मरीज़ों ने यह पाया हैं कि इलाज से काफी हद तक पीड़ा और खुजली में आराम मिलता है।एक अच्छा डॉक्टर शुरूआती तौर पर जीवनशैली में परिवर्तन लाने के लिए कहेगा । जो की हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होगी।

अगर आप ऊपर दिये गए उपायो और परहेज को अपनाते है तो आपकी बवासीर की परेशानी दूर हो जाएगी। और आप स्वस्थ रहेगे।

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