Pregnancy Symptoms In Hindi

प्रेग्नेंसी क्या है? अधिकांश महिलायें पीरियड का न आना प्रेग्नेंसी का ही कारण मानती है। प्रेग्नेंसी के शुरुवाती दिनों मे महिलाओं को पीरियड रुकने तक पता ही नहीं लग पता की उनकी कोख मे कोई पल रहा है। शुरुआत मे तो महिलाएं यह जानने के लिए उत्सुक रहती है की वो प्रेग्नेंट है की नहीं।माँ बनना एक औरत के लिए बहुत ही सुखद एहसास है।प्रेग्नेंट होने पर स्तनो मे सूजन का आना, सिर दर्द और पैरो मे सूजन,जी मितलाना आदि लक्षण दिखाई देते है।

प्रेग्नेंसी के पहले सप्ताह मे तो प्रेग्नेट होने का पता भी नहीं चलता,बल्कि इस हफ्ते मे सिर्फ भ्रूण के बनने की शुरुआत होती है। गर्भवती महिलाओं को अपने खान पान का पूरा ध्यान रखना चाहिए,आहार मे विटामिन,प्रोटीनऔर कैलोरी की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। पहले हफ्ते मे सिर्फ आंदरुनी बदलाव होते है,शरीर के बाहर कोई बदलाव नज़र नहीं आता।
पीरियड के १४ दिन बाद ओवुलेशन का समय शुरू हो जाता है,यह समय गर्भधारण के लिए बेहतर होता है। गर्भधारण के बाद हारमोन परिवर्तन होने लगते है,जिससे गर्भवती महिला के स्वभाव मे उतार चढ़ाव आना शुरू हो जाते है। प्रेग्नेंसी का मुख्य लक्षण उल्टी होना भी है। बार बार उल्टी होना और गर्भधारण की शंका होने पर दवा लेने से अच्छा डॉक्टर से सलाह लेना है।

प्रेग्नेंसी के लक्षण (Pregnancy Ke Lakshan Hindi Me)

#१. पीरियड का नहीं आना (Pregnancy symptoms after missed period in hindi) 

  • प्रेग्नेंसी का पता तभी चलता है जब पीरियड का आना बंद हो जाता है,यह इसका सुरुवाती लक्षण है।
  • बहुत सी महिलाओं को तो शुरू के एक या दो हफ़्तों तक हल्की ब्लीडिंग भी हो जाती है,लेकिन सिर्फ पीरियड मिस होने से किसी भी महिला को प्रेग्नेंट नही कहा जा सकता इसके लिए हमे प्रेग्नेंसी किट के द्वारा जो मार्केट मे आसानी से उपलब्ध है जांच कर लेना चाहिए।क्योकि कभी कभी पीरियड मिस होने के और भी कारण हो सकते है।

#२. मुंह का स्वाद बदलना (Pregnancy me Taste Change ho jana)

प्रेग्नेंसी के पहले महिने मे कुछ भी खाना अच्छा नहीं लगता,अच्छा खाना भी बिना टैस्ट का ही लगता है। किसी महिला को मीठा तो किसी को खट्टा पसंद आता है। मुंह का स्वाद कड़वा हो जाता है।

#३. पेशाब अधिक आना (Pregnancy me bar bar bathroom ana)

बार बार पेशाब आना प्रेग्नेंसी सिम्पटम्स मे से एक है,जैसे जैसे गर्भावस्था का समय बीतता जाता है वैसे वैसे यह परेशानी बढ़ती जाती है। इस समय मे हारमोन बहुत तेजी से बदलते है जिसकी वजह से किडनी मे रक्त प्रवाह तेज़ होने लगता है,और ब्लाडर मे यूरिन जल्दी भर जाता हैऔर पेशाब बार बार होने की समस्या हो जाती है,लेकिन डेलीवरी के बाद यह ठीक हो जाती है।

#४. स्वभाव मे परिवर्तन आना (Pregnancy me becheni hona gussa hona aur ghabrahaat hona)

प्रेग्नेसी के शुरुवात मे स्वभाव मे भी परिवर्तन होने लगता है,इस समय मे चिड़चिड़ापन होना,तनाव होना,जल्दी गुस्सा आना,तनाव मे रहना,ज्यादा थकान होना भी होता है।

#५. सिर मे दर्द होना (Pregnancy me headache hona)

प्रेग्नेंसी के शुरुवाती लक्षण मे सिर मे दर्द रहना एक आम बात है,सिर मे दर्द हारमोन मे बदलाव के कारण ही होता है।

#६. ब्रेस्ट मे बदलाव आना (Breast changes during pregnancy in hindi)

स्तन का मुलायम होना और सूजन दिखने पर भी प्रेग्नेंसी के संकेत हो सकते है। स्तनो के आकार मे बदलाव भी गर्भावस्था के सुरुवाई लक्षण मे से एक है। प्रेग्नेंसी के पहले से दूसरे सप्ताह मे ब्रेस्ट मे हल्की सूजन आने लगती है।

#७. कब्ज की शिकायत (Pregnancy me kabz)

प्रेग्नेंसी मे शरीर के हारमोन मे बदलाव के कारण पाचन शक्ति कमजोर होने लगती है जिससे बहुत सी महिलाओं को कब्ज की समस्या होने के कारण पेट साफ नहीं होता है।

#८. जी मिचलाना, उल्टी आना, गॅस बनना (Pregnancy me ulti hona)

पीरियड बंद होने के एक से दो हफ्ते मे उल्टी आना जी मिचलाना होने लगता है जिससे भी प्रेग्नेंसी का पता चलता है। इस समय मे गॅस भी बहुत बनती है जिससे पाचन क्रिया भी प्रभावित रहती है और गॅस की समस्या ९ महीने तक बनी रहती है।

अगर इनमे से कुछ भी लक्षण दिखे तो हमे तुरंत प्रेग्नेंसी की जांच कर लेना चाहिए।और अपनी केयर शुरू कर देनी चाहिए गर्भधरण के बाद गर्भवती महिला को तुरंत डॉक्टर से मिलकर अपनी खान पान की आदतों और अन्य दिनचर्या को जैसे रहन सहन आदि के बारे मे बात करनी चाहिए। गर्भधारण के बाद औरत को अपने लिए नहीं बल्कि पेट मे पल रहे शिशु के लिए खाना होता है। हमे डॉक्टर से सलाह लेकर अपने आहार मे विटामिन,प्रोटीन,और केलोरी की मात्रा को बढ़ा देना चाहिए। सबसे ज्यादा विटामिन बी यानि फॉलिक एसिड की मात्रा का सेवन करना जरूरी होता है,इसके सेवन से होनेवाले बच्चो मे जन्मजात दिमाज और रीढ़ की हड्डी की परेशानियो से बचा जा सकता है।

गर्भवती महिला को अपने भोजन मे हरी सब्जियाँ,दल,मौसमी फल को जरूर शामिल करना चाहिए। अत्यधिक ठंडा और अत्यधिक गरम पदार्थ का सेवन भी नहीं करना चाहिएऔर ज्यादा देर भूखे भी नहीं रहना चाहिए।

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