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क्या और कैसे होता है सोरायसिस (छाल रोग) ? (Psoriasis meaning in Hindi)

सोरायसिस को हिन्दी में छाल रोग और अँग्रेजी में Psoriasis भी कहते है साथ ही ये एक प्रकार का चर्मरोग है।कुछ लोग इसे अपरस भी कहते हैं। यह रोग एक संक्रामक दीर्घकालिक त्वचा विकार नहीं है जो कि परिवारों के बीच चलता रहता है। छाल रोग बहुत ही बदतर स्थिति का होता है। इसके कारण त्वचा पर लाल-लाल खुरदरे धब्बे बन जाते हैं। यह दीर्घकालिक विकार है जिसका अर्थ होता है कि इसके लक्षण वर्षों तक बने रहेंगे। ये पूरे जीवन में आते-जाते रहते हैं। यह स्त्री-पुरुष दोनों को ही हो सकता है। इसके कारण रोगप्रतिरोधक प्रणाली की गड़बड़ी से होता है या फिर गलत खान पान या कोई बीमारी से भी।

सोरायसिस होने के लक्षण (Symptoms of Psoriasis in Hindi)

सोरायसिस में त्वचा पर लाल खुरदरे धब्बे पड़ जाते है, जिससे त्वचा के मोती परत में त्वचा के कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाने के कारण पैदा होते हैं। ऐसे तो त्वचा की कोशिकाएं पुरानी होकर शरीर के तल से झड़ती रहती है। इस प्रक्रिया में लगभग 4 सप्ताह का समय लग जाता है। लेकिन कुछ व्यक्तियों को जो सोरायसिस के शिकार होने पर त्वचा की  कोशिकाएं 5 से 6 दिन में ही झड़ने लगती है। यही अधिकाधिक त्वचा के कोशिकाओं का झड़ाव त्वचा पर छालरोग के घाव पैदा कर देता है। छालरोग या सोरायसिस में त्वचा पर लाल, खुरदरे धब्बे, खुजली और मोटापा, चिटकना और हथेलियों या पैर के तलवों में फफोले पड़ने लगते है जिससे सोरायसिस की पहचाने की जाती हैं। ये लक्षण हल्के-फुल्के से लेकर भारी मात्रा में होने लगते हैं। इससे विकृति(deformity) और अशक्तता(disability) की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे व्यक्तिओ को कही भी जाने में या लोगो के बीच जाने में भी शर्म आने लगती है।ऐसे में कई लोग मज़ाक भी बनाते है।

कुछ कारण है जिनसे सोरायसिस से पीड़ित व्यक्तियों में चकते पड़ सकते हैं। इन कारकों में त्वचा की खराबी (रसायन, संक्रमण, खुरचना, धूप से जलन) ,हार्मोन परिवर्तन, धूम्रपान, बेटा-ब्लाकर जैसी औषधी तथा तनाव सम्मिलित हैं। छाल रोग से व्यक्तियों पर भावनात्मक तथा शारीरिक प्रभाव पड़ सकते हैं। छाल रोग आर्थरायटिस वाले व्यक्तियों को होते हैं। इससे दर्द होता है तथा इससे व्यक्ति अशक्त भी हो सकता है। छाल रोग संक्रामक नहीं है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को नहीं लगता।

सोरायसिस होने के कारण (Causes Of Psoriasis in Hindi)

१) वंशानुगत पूर्ववृत्ति (Hereditary Predisposition)

ये एक महत्तपूर्ण कारण माना जाता है छाल रोग होने का। ये भी कहा जाता है की यदि कोई व्यक्ति सोरियासिस का शिकार हा तो उसके बच्चे को भी इस रोग का होने का २० प्रतिशत संभावना होती है। और अगर दोनों माता-पिता को ये रोग है तो ७० प्रतिशत होने का डर होता है।इसलिए जरूरी है की हम इस बीमारी से बचे।

२) गलत खान पान है सोरायसिस के कारण (Bad Eating Habits As A Cause Of Psoriasis in Hindi)

पहले के बड़े लोग कहते थे की अगर व्यक्ति बहुत अधिक असमान भोजन एक साथ खाता है जैसे की मछली और दही  को एक साथ खाए या कोई अन्य भोजन जो एक साथ न खाना चाहिए वो खाये या फिर कोई चीज जो हमारे शरीर के लिए सही नहीं हो तो इससे बीमारी हो सकती है।जैसे जंक फूड,शहद,लहसुन, तेल से बनी चिजे,या समुद्री भोजन ,मुली या मसाले दार या खट्टा ज्यादा खाने से भी सोरायसिस हो ध्रूमपान और शराब के ज्यादा सेवन से भी सोरायसिस बढ़ जाता है तो जरूरी है खाने पीने में ध्यान रखा जाए।

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३) अधिक तनाव है सोरायसिस का कारण (More stress As a Cause Of Psoriasis in Hindi)

आज लोगो के जीने का तरीका भी बदल सा गया है।लोग काम में इतने व्यस्त रहने लगे की वो अपने ऊपर ध्यान नहीं रख पाते साथ ही बहुत अधिक तनाव में रहते है।जिससे वो कई तरह की बीमारियो के घेरे में आ जाते है उनमे से एक है सोरायसिस ।

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४) रोगप्रतिरोधक क्षमता प्रणाली है सोरायसिस का कारण (Immune System As A Cause of Psoriasis in Hindi )

प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी से भी सोरियासिस होने का डर रहता है।ये स्वस्थ त्वचा की कोशिकाओ पे हमला करती है जिससे त्वचा पर लाल चकते जैसी छाल रोग होने लगति है।त्वचा की कोशिकाओ पर वाइरस और जीवाणुओ पर प्रभाव पड़ता है जिससे वो अपने ही शरीर को हनी पहुचाने लगती है।और बहुत से रोगो का कारण बनती है। इससे नई त्वचा कोशिकायो का उत्पादन होता है जो skin पे डार्क स्पॉट, ब्लेमिशेस जैसे रोग होने लगते है।

५) बैक्टीरीयल संक्रमण से सोरियासिस का कारण (Bacterial Infection As A Cause of Psoriasis in Hindi)

कई बार हमे ये चोट लग जाती है जो कभी तो सही हो जाती है पर कभी उसमे इन्फ़ैकशन होने लगता है। उसे हम सोरायसिस भी कह सकते है। और कभी तो कोई बीमारी की वजह से भी वायरल और  bacterial इन्फ़ैकशन के कारण भी सोरायसिस होने का डर होता है। कई बार तो Pollution के कारण भी सोरायसिस की प्रोब्लेम हो जाती है।

सोरायसिस के विभिन्न प्रकार (Different Types Of Psoriasis In Hindi)

१) सोरायसिस वल्गरिस (Psoriasis Vulgaris) 

     गट्टाट छालरोग (छोटे, ड्रॉप जैसे स्पॉट)

२) उलटा छालरोग (Inverse Psoriasis)

अंडरमर्स, नाभि, जीरो, और नितंबों की तरह की परतों में सहित छालरोग के कई अलग-अलग रूप हैं।

३) पस्टुलर सोरायसिस (Pustular Psoriasis) (छोटे मवाद से भरा पीला छाले)

जब हथेलियों और तलवों को शामिल किया जाता है, तो इसे पामोप्लांटार छालरोग के रूप में जाना जाता है।

४) इरिथ्रोडार्माइकल सोरायसिस (Erythrodermic Psoriasis)

छालरोग के इस रूप के साथ मरीजों को अक्सर ठंडा महसूस होता है और हृदय की विफलता को विकसित कर सकता है यदि उनके पास पहले से मौजूद हृदय की समस्या है ।

५)  नेल सोरायसिस (Nail Psoriasis)

पीले रंग की नाखूनों का निर्माण करती है जो नाखून कवक के साथ भ्रमित हो सकते हैं। स्कैल्प छालरोग, स्थानीयकृत बालों के झड़ने, रूसी के बहुत सारे, और गंभीर खुजली पैदा करने के लिए पर्याप्त गंभीर हो सकता है।

सोरायसिस या छाल रोग से कैसे बचे (How to Prevent Bark Disease or Psoriasis in Hindi)

१) खान पान से सोरायसिस का बचाव (Protecting Psoriasis in Hindi Through Food)

व्यक्ति को जो आहार अच्छा लगे, वही उसके लिए उत्तम आहार है क्योंकि छाल रोग से पीड़ित व्यक्ति खान-पान की आदतों से उसी प्रकार लाभान्वित होता है जैसे हम सभी होते हैं। कई लोगों ने यह कहा है कि कुछ खाद्य पदार्थों से उनकी त्वचा में निखार आया है या त्वचा बेरंग हो गई है। इस रोग में आपको हरी सब्जिया,फलीया,दाल,फल का अध्क सेवन करना चाहिए। इनमे एंटि inflammatory गुण होता है और साथ में कुछ में तो फ़ाइबर भी अधिक मात्र में होती है।इस रोग में आपको बहुत अधिक नमकीन सेवन से बचना होगा साथ ही बाहर का खाना भी बंद करना होगा और जो आपको आसानी से पचे वही भोजन आपके लिए सर्वश्रेस्ठ है।मद्यपान और धूम्रपान बिलकुल न करें तो ही फायदा मिलेगा। बहुत अधिक खट्टा खाने से भी आपको बचना होगा।

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२) त्वचा का रखे खयाल तभी होगा सोरायसिस से बचाव (Skin Care Can Prevent Psoriasis In Hindi)

आपको अपने त्वचा का खास ध्यान रखना पड़ेगा सोरायसिस से बचने के लिए। अगर आपको कही चोट लग गयी हो तो उसमे बकटेरियल इन्फ़ैकशन होने का दर हो जाता है इसलिए ध्यान रखे उस कट को खुला न छोड़े। अपनी त्वचा को सूखने न दे । इसे अच्छे से रखने के लिए आप मॉइस्चराइज़र का भी प्रयोग कर सकते है। तेज धूप में त्वचा को चोट न पहुंचने दें। त्वचा का पानी से संपर्क सीमित रखें। फुहारा और स्नान को सीमित करें, तैरना सीमित करे।ऐसे कपड़े पहने जो त्वचा के संपर्क में आकर उसे नुकसान न पहुंचाएँ।

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३) प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वस्थ रखे (Keep The Immune System Healthy)

सोरायसिस को छाल रोग कहते है जो गैर संक्रामक रोग है। इसमे त्वचा में लाल दाग धब्बो होने लगते है जिससे आपकी त्वचा अच्छी नहीं लगती है जिससे आपको कही भी जाने में शर्म होती है। सोरायसिस में हमारे इम्यून सिस्टम कभी ज्यादा और कभी कम काम करने लगते हैं जिससे कारण जो त्वचा की परत १० -१५ दिन में कोशिकायो उत्पन्न होती है वो ४ से ५ दिन में उत्पन्न होने लगती है। इसलिए जरूरी है हम अपने immune system को सही रखे इसके लिए चाहे हमे बहुत मेहनत ही क्यू न करनी पड़े।

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४) तनाव पर नियंत्रण रखने पर ही सोरायसिस से बचाव होगा (Control Stress To Prevent Psoriasis In Hindi)

सोरायसिस का प्रमुख कारण है तनाव जो आजकल की लाइफ स्टाइल में होना आम बात है। तनाव बढ्ने से सोरायसिस का खतरा हो सकता है। इसलिए जरूरी है हम अपने तनाव को सीमित रखे। अगर आपसे तनाव कंट्रोल नहीं हो पता तो आप अपने डॉक्टर से मिले और इस स्थिति के बारे में बात करे। आप अपना मूड अच्छा रखे। अगर किसी बात पर आपको स्ट्रैस हो रहा हो या टेंशन हो रही हो तो उन बातो पर ध्यान न देकर आप अपने आपको दूसरी गतिविधियो में व्यस्त रखे। इसके लिए आप योगा और व्यायाम का भी सहारा ले सकते है जिससे आपको शांति मिलेगी और आप अपने स्वास्थ को ठीक रख पाएगे।

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क्या स्वास्थ्य देखभाल विशेषज्ञ (सोरायसिस) छालरोग का इलाज करते हैं? (Do Health Care Specialists Treat Psoriasis?)

त्वचा विशेषज्ञ डॉक्टर हैं जो सोरायसिस के निदान और उपचार में विशेषज्ञ हैं, और रुमेटोलॉजिस्ट संयुक्त विकारों और Psoriatic गठिया के उपचार में विशेषज्ञ हैं। कई प्रकार के चिकित्सक त्वचा विशेषज्ञों, पारिवारिक चिकित्सकों, आंतरिक चिकित्सकों, संधिशोथ विशेषज्ञों और अन्य चिकित्सा डॉक्टरों सहित छालरोग का इलाज कर सकते हैं।अमेरिकी अकादमी त्वचा विज्ञान और राष्ट्रीय सोरायसिस फाउंडेशन उत्कृष्ट डॉक्टर हैं, जो इस बीमारी के विशेषज्ञ हैं। सभी त्वचा विज्ञानी और रुमेटोलॉजिस्ट, छालरोग का इलाज नहीं करते हैं| राष्ट्रीय सोरायसिस फाउंडेशन मौजूदा सोरायसिस विशेषज्ञों के सबसे अद्यतित डेटाबेस में से एक है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि छालरोग वाले रोगियों को विभिन्न बीमारियों की स्थिति में प्रवण होता है, छालरोग के साथ रोगियों में हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, सूजन आंत्र रोग, हाइपरलिपिडामिया, यकृत की समस्याएं, और गठिया अधिक आम हैं। इन संबंधित बीमारियों के लिए उनके प्राथमिक देखभाल प्रदाताओं द्वारा सोरायसिस के सभी रोगियों के साथ ध्यानपूर्वक निगरानी करने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है। Psoriatic गठिया और इसकी जटिलताओं की संयुक्त सूजन अक्सर आरयूमेटोलॉजिस्ट द्वारा प्रबंधित की जाती है।

छालरोग (सोरायसिस) उपचार के विकल्प क्या हैं? (What Are The Options For Treatment Of Psoriasis In Hindi?)

१) सामयिक उपचार (Topical Treatments)

सबसे अच्छा इलाज उपचार चिकित्सक द्वारा व्यक्तिगत रूप से निर्धारित किया जाता है और बीमारी के प्रकार, गंभीरता, और शामिल त्वचा की मात्रा के प्रकार पर निर्भर करता है। हल्के बीमारी के लिए शरीर में केवल छोटे क्षेत्रों (कुल त्वचा की सतह का 10% से कम) शामिल है, सामयिक उपचार (त्वचा लागू), जैसे कि क्रीम, लोशन, और स्प्रे, बहुत प्रभावी और प्रयोग करने में सुरक्षित हो सकते हैं। कभी-कभी, स्टेरॉयड का एक छोटा सा स्थानीय इंजेक्शन सीधे एक कठिन या प्रतिरोधी पृथक सोरियाटिक पट्टिका में सहायक हो सकता है।सामयिक इलाज में शामिल है कोर्टिकोस्टीराइडस, रेटिनोइड, एंथ्रालीन,विटामिन डी, सेलसिलिक एसिड जैसे उपचार शामिल है।

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२) प्रणालीगत दवाइए (Systematic Medicines)

मध्यम से गंभीर बीमारी के लिए जो शरीर के बहुत बड़े क्षेत्रों (> 10% या अधिक त्वचा की सतह से अधिक) शामिल है, इसके लिए प्रणालीगत (कुल शरीर उपचार जैसे गोलियां या इंजेक्शन) दवाओं की आवश्यकता हो सकती है चूंकि सामयिक चिकित्सा का सोरिएरिक संधिशोथ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, सामान्यतः प्रणालीगत दवाओं को सामान्य संयुक्त विनाश के लिए प्रगति को रोकने की आवश्यकता होती है।इसके लिए इन दवाओ में शामिल है मेथो ट्रेक्सेट ,साइक्लोस्पोरिन,बायोलोजिक्स,रेतनाइडस है जो सोरायसिस के इलाज में काम आ सकती है।

३) लाइट थेरेपी (Light Therapy)

सोरायसिस के उपचार के लिए UV प्राकृतिक प्रकाश का उपयोग किया जाता है। सूर्य की रोशनी जब त्वचा पर पड़ती है तो वो सफ़ेद खून की कोशिकाओ को खत्म करती है जो स्वस्थ त्वचा के कोशिकाओ पर प्रभाव डालती है। इसके लिए उव और उवा दोनों ही उपचार बहुत ही प्रभावशाली होंगे।

चिकित्सको ने छाल रोग(सोरायसिस) का निदान कैसे किया?

१) शारीरिक परीक्षण( Physical Examination)

अधिकतर डॉक्टर सोरायसिस का परीक्षण साधारण तोर पे ही करते है।सोरायसिस का लक्षण या स्थिति ऐसे तो स्पष्ट नहीं है। पर इस परीक्षण के दौरान चिकित्सक को सोरायसिस वाली लक्षण जो आसानी से दिखती नहीं है वो छालरोग का निदान आमतौर पर त्वचा की शारीरिक जांच, चिकित्सा के इतिहास और संबंधित परिवार स्वास्थ्य इतिहास से जानकारी प्राप्त करने के द्वारा किया जाता है।इसलिए जरूरी है आप अपने डॉक्टर से खुल कर इस बारे में बात करे।

२) बायोप्सी (Biopsy)

सोरायसिस में अगर लक्षण स्पष्ट नहीं होता तो वो अपने संदेह को खत्म करने के लिए कई टेस्ट कराते है।जैसे की आपके त्वचा का एक हिस्सा या टुकड़ा लेते है और उसे बायोसपी या आँय टेस्ट के द्वारा ही जाना जाता है।ये नमूने को प्रयोगशाला  में भेज कर microscopicपरीक्षण किया जाता है।जिसमें त्वचा बायोप्सी से प्राप्त ऊतकों की सूक्ष्म परीक्षा सहित, आवश्यक हो सकता है।परीक्षण से सोरायसिस का निदान संभव हो सकता है।

किसी भी मेडिकल दृष्टि के रूप में ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि किसी भी चिकित्सा स्थिति के साथ, सभी दवाइयां संभव दुष्प्रभाव लेती हैं। हर किसी के लिए कोई दवा 100% प्रभावी नहीं है, और कोई दवा 100% सुरक्षित नहीं है किसी भी दवा के उपयोग के निर्णय के लिए आपके डॉक्टर के साथ पूरी तरह से विचार और चर्चा की आवश्यकता है। प्रत्येक प्रकार के छालरोग और व्यक्ति के लिए दवाओं के जोखिम और संभावित लाभ पर विचार किया जाना चाहिए।

 

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