Benefits And Side Effects Of Zandu Pancharishta in hindi

झंडू पंचारिष्ट रसायन गुणो से युक्त माना जाता है। पंचारिष्ट आयुर्वेद के आसव अरिष्ट सिन्धांत पर बनी एक दवा है जो पाचन संबंधी रोगों और पेट की बीमारियों के लिए एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है। यह पाचन तंत्र के कार्यों में सुधार लाती है और भूख बढ़ाती है। यह पेट की गैस, पेट फूलना, उदर विस्तार और पेट के भारीपन को दूर करती है।

इस में मौजूद घटक अम्लपित में भी हितकर है। इसका प्रयोग पुरानी कब्ज और पेट में दर्द में भी किया जाता है। ये कब्ज,गैस,अफाराया,पेटफूलना,अरुचि,भूख की कमी,गैस के कारण होने वाला पेट दर्द,अम्लपित्त,अपच,अजीर्ण,बदहजमी,पेट में भारीपन,उदर विस्तार जैसे बीमारियो से जल्द छुटकारा दिलाती है।

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झंडू पंचारिष्ट के सामाग्री (Ingredients of zandhu pancharistra in Hindi )

घटक द्रव्यों के नाम

  • द्राक्षा २.५ g
  • घृतकुमारी २.५g
  • गिलोय .५g
  • दशमूल २ g
  • बला.५g
  • त्रिफला .६g
  • शतावरी १g
  • अश्वगंधा१g
  • मुलेठी .५g
  • शटी (कपूरकचरी)
  • त्रिकटु .३ g
  • अजमोद.१g
  • त्रिजात .३g
  • हल्दी.१ g
  • मंजिष्ठा .२ g
  • अर्जुन .२ g
  • जीरा .१g
  • धनिया .१g
  • लौंग .१g
  • अजमोद
  • मंजीठ
  • अर्जुन

झंडू पंचारिष्ट के औषधीय गुण

१) पाचक टॉनिक (पाचन) – पाचन शक्ति बढाने वाली (लगभग सभी जड़ी बूटियों में यह गुण है)
२) वातअनुलोमन – कोष्टगत वात को कोष्ट से बाहर निकाले
३) दीपन – अग्नि प्रदीपक
४) क्षुधावर्धक
५) हल्की रेचक – किशमिश और एलो वेरा के कारण
६) अम्लत्वनाशक (एंटासिड) – शतावरी, मुलेठी, धनिया और जीरा के कारण
७) रक्तरंजक (हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाती है) – किशमिश, शतावरी और अश्वगंधा के कारण
८) वातहर और बादी विरोधी (दशमूल, गिलोय और जीरा के कारण)
९) शोथहर – दशमूल, अश्वगंधा और अन्य के कारण
१०) प्रतिउपचायक (एंटीऑक्सीडेंट) – सभी जड़ी बूटियां एंटीऑक्सीडेंट हैं
११) वेदनास्थापन – पीड़ाहर (दर्द निवारक) – विशेषत: पेट दर्द में लाभ करता है

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झंडू पंचारिष्ट के लाभ एवं उपयोग (Benefits & Uses of Zandhu Pancharistra in Hindi)

झंडू पंचारिष्ट का मुख्य रूप से पेट की बीमारियों के लिए प्रयोग किया जाता है। इस के सभी घटकों का पाचन तंत्र पर प्रभाव पड़ता है।

१) इस में मौजूद किशमिश, एलो वेरा, जीरा, धनिया, त्रिकटु , मंजिष्ठा, अजमोद, जीरा और लौंग जैसे सभी घटक पेट की वायु, पेट फूलना, सूजन और पेट के भारीपन को कम करने में सहायक हैं।कब्ज झंडू पंचारिष्ट के मुख्य घटक किशमिश और घृत कुमारी (एलो वेरा) हैं, जो नई पुरानी कब्ज को कम करने में सहायक होते है।

२) दशमूल, गिलोय और अश्वगंधा पाचन नली को मजबूत करता है और पेशियों की अनुकूलतम गति को बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए, ये घटक पुरानी कब्ज में प्रभावी बनाते हैं।

३) त्रिफला का सीधे हल्का रेचक प्रभाव होता है, जो कब्ज और अन्य पाचन रोगों के प्रबंधन में एक सहायक की भूमिका निभाता है।

४) कभी कभी, एसिडिटी भी भूख में कमी और गले, छाती एवं पेट में जलन के कारण आहार में अरुचि पैदा कर देती है। कई रोगियों में यह देखा गया है। पंचारिष्ट इन लोगों के लिए बहुत ही लाभदायक है। हालांकि, यदि इस के साथ में मुलेठी चूर्ण, आमला चूर्ण, प्रवाल पिष्टी, मुक्ता शुक्ति पिष्टी आदि भी लिया जाये तो यह यह अधिक उपयोगी सिद्ध होता है।

५) झंडू पंचारिष्ट वात नाशक (वातहर) और वातअनुलोमक है अर्थात यह कोष्टगत वात को कोष्ट से बाहर निकालता है और उस की उत्पति को नियंत्रित करता है।

६) अश्वगंधा और शतावरी आंतों और पेट की मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करते हैं, जो खाद्य पदार्थ को आंत में आगे चलाने में मदद करता है।

७) पंचारिष्ट में कुछ जड़ी बूटियां यकृत (लिवर) के काम में सुधार लाती हैं, जिसकी मदद से आंतों में पित्त का उचित प्रवाह होता है, जिससे क्रमाकुंचन (peristalsis) में भी सुधार होता है।

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झंडू पंचारिस्ट के स्वस्थ्य लाभ (Therapeutics uses of Zandu Pancharistra in Hindi)

१) यह गॅस के दर्द में आराम दिलाता है।
२) यह पाचन शक्ति को बढ़ा कर खाये हुए भोजन को पचाने में मदद करता है।
३) यह एक एंटीओक्सीडेंट है जो की सेल्स को फ्री सेल डेमेज से बचाता है।
४) यह पेट में रुकी हुई गॅस को नीचे की तरफ ले जाने में मदद करती है।
५) यह पेशाब को उचित मात्रा में लता है।
६) यह भूख बढ़ाने में और पोस्टिक टॉनिक है।
७) ये लिवर को ताकत देता है साथ ही दस्त को साफ करता है और कब्ज में राहत देता है।
८) यह नए रक्त को बनाने में मदद करता है जिससे शरीर को ताकत और स्फूर्ति देता है।
९) ये मानशिक थकावट को दूर करता है और नसो को ताकत देता है।
१०) ये एसिडिटि ,मंदागिन को दूर करता है। ये शरीर में जल्दी अवशोसित हो जाता है।

मात्रा एवं सेवन विधि (Dosage of Zandhu Pancharistra in Hindi)

झंडू पंचारिष्ट की खुराक वयस्कों के लिए 6 चम्मच (30 एमएल) है। इसको पानी की बराबर मात्रा (30 एमएल) के साथ मिलाया जाना चाहिए और भोजन के तुरंत बाद लिया जाना चाहिए। पंचारिष्ट की अधिकतम खुराक एक दिन में 60 मिलीलीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।

आमतौर पर झंडू पंचारिष्ट की प्रयोग अवधि न्यूनतम 1 महीने से अधिकतम 6 महीने तक होती है।उपचार की अधिकतम अवधि स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार भिन्न हो सकती है। कुछ लोगों को इसे 6 महीने के लिए भी लेने की आवश्यकता हो सकती है। पंचारिष्ट से आम तौर पर हर किसी को पाचन रोगों से राहत 3 महीने के भीतर मिल जाती है, लेकिन अगर आपको 3 महीने के भीतर राहत नहीं मिलती है, तो आपको चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

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झंडू पंचारिस्ट के दुष्प्रभाव (Side Effects of Zandhu Pancharistra in Hindi)

झंडू पंचारिष्ट ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है। इस में कोई ऐसी जड़ी बूटी नहीं है जिसका कोई गंभीर दुष्प्रभाव (side effects) हो।

सावधानियां

१) मधुमेह में सावधानी से प्रयोग

मधुमेह के रोगियों को इसका प्रयोग सावधानी से करना चाहिए। मधुमेह ग्रसित लोगों के रक्त शर्करा स्तर की जाँच करते रहना चाहिए। पंचारिष्ट में शर्करा और किशमिश होती है जो आप के रक्त शर्करा स्तर को बढ़ा सकती है।ऐल्कोहॉल स्तर वाली औषधियां को भी मधुमेह में उपयोग ना करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे रक्त शर्करा स्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है।

२) मुँह में छाला

हालांकि, पंचारिष्ट में कुछ शीतलता प्रदान करने वाली जड़ी बूटियां हैं, जिसका अर्थ है कि यह मुँह के छालों और अम्लता में भी राहत प्रदान कर सकता है। किण्वन प्रक्रिया और ऐल्कोहॉल स्तर के कारण, अल्सर रोधी प्रभाव एक बड़ी हद तक कम हो जाता है। इसलिए, अगर किसी का मुंह के छालों का इतिहास है, यह मुँह के छालों की पुनरावृत्ति की प्रवृत्ति को बढ़ा सकता है। हालांकि, यह शायद ही कभी हो, लेकिन इस आशय की जानकारी होनी चाहिए।

३) इसे गर्भावस्था में न ले।

४) इसे निर्धारित मात्र में ही ले।

अधिक मात्र में न ले। अगर लिया गा तो पेट में जलन और शरीर में अधिक गर्मी हो सकत है।

५) ये दवा छोटे बच्चो को न दे ।

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